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तिरंगे की गरिमा के लिए सूरत में 350 स्थानों पर कलेक्शन बॉक्स, शक्ति ग्रुप की पहल

सूरत फ्यूचर फाउंडेशन और शक्ति ग्रुप कंपनीज की इंडिया पोस्ट (सूरत डिवीज़न) के सहयोगसे पहल; 21 अगस्त तक बॉक्स में जमा कर सकेंगे राष्ट्रध्वज सूरत (गुजरात) [भारत],15 अगस्त: राष्ट्रध्वज तिरंगे की गरिमा बनाए रखने और इस्तेमाल के बाद उसे सड़कों या अन्य स्थानों पर बिखरा हुआ पाए जाने से रोकने के लिए सूरत फ्यूचर फाउंडेशन […]

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पारुल यूनिवर्सिटी छात्रों ने स्वतंत्रता दिवस पर चलाया स्वच्छता अभियान

वडोदरा (गुजरात) [भारत], 21 अगस्त: स्वतंत्रता केवल उस आजादी को याद करने के बारे में नहीं है, जिसके लिए हमने संघर्ष किया था। यह उस समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पहचानने के बारे में भी है, जिसका हम हिस्सा हैं। हमारे 80वें स्वतंत्रता दिवस की सुबह-सुबह 200 से अधिक छात्रों और युवाओं ने विश्वविद्यालय […]

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पारुल यूनिवर्सिटी छात्रों ने स्वतंत्रता दिवस पर चलाया स्वच्छता अभियान

वडोदरा (गुजरात) [भारत], 20 अगस्त: स्वतंत्रता केवल उस आजादी को याद करने के बारे में नहीं है, जिसके लिए हमने संघर्ष किया था। यह उस समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पहचानने के बारे में भी है, जिसका हम हिस्सा हैं। हमारे 80वें स्वतंत्रता दिवस की सुबह-सुबह 200 से अधिक छात्रों और युवाओं ने विश्वविद्यालय […]

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सूरत में पहली बार तीन दिवसीय ‘कृष्णोत्सव’: भक्ति, प्रेम और उत्सव का अनूठा संगम

सूरत (गुजरात) [भारत],19 अगस्त: जन्माष्टमी के पावन पर्व को आधुनिकता और आध्यात्मिक अनुभूति के अनूठे संगम के साथ मनाने के लिए सूरत में पहली बार तीन दिवसीय भव्य ‘कृष्णोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। प्रो क्रिएट इवेंट्स की ओर से 29, 30 और 31 अगस्त को सूरत एयरपोर्ट के पास सूरत-डुमस रोड स्थित अद्वैता […]

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तिरंगे से लेकर पौधों तक, इगतपुरी के आदिवासी स्कूल में आज़ादी बनी बच्चों के सपनों की उम्मीद

नई दिल्ली,13 अगस्त: इगतपुरी की पहाड़ियों के बीच 15 अगस्त की सुबह हमेशा कुछ अलग ही होती है, हवा में ठंडक होती है पेड़ों की हरियाली मन को छूती है , और दूर तक फैली प्रकृति के बीच तिरंगे को लहराते देखना अपने आप में एक अलग अनुभव होता है लेकिन इस बार इगतपुरी के […]

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एडवोकेट जीवनदत्त अरगड़े को किसान कांग्रेस में पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी

आगामी विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण नियुक्ति; किसानों और कृषि श्रमिकों के मुद्दों पर संगठन को मजबूत करने पर जोर बार्शी (महाराष्ट्र) [भारत], 8 अगस्त: अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के संगठनात्मक विस्तार को और मजबूत करने के उद्देश्य से बार्शी के एडवोकेट जीवनदत्त अरगड़े को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी (In-charge – Uttar Pradesh […]

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आषाढ़ी दूज पर मिनी रणूजा में ‘ग्रीनमैन’ विरल देसाई ने किया भव्य पौधारोपण व पौधा वितरण

सूरत (गुजरात) [भारत], 21 जुलाई: पलसाना के पास गंगाधरा गांव में स्थित श्री शिवशक्ति रामदेव अलखधाम में आषाढ़ी दूज के पावन त्योहार पर प्रसिद्ध पर्यावरणविद् ‘ग्रीनमैन’ विरल देसाई द्वारा एक विशेष पौधारोपण और पौधा वितरण अभियान चलाया गया। दक्षिण गुजरात के ‘मिनी रणूजा’ के रूप में प्रसिद्ध इस अलखधाम में आषाढ़ी दूज का महोत्सव पूरे […]

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अधिराज ब्रोगहर डेवलपर LLP के ‘द क्राउन’ का भूमि पूजन संपन्न; सांसद मनोज तिवारी रहे मुख्य अतिथि

अहमदाबाद (गुजरात) [भारत], 13 जुलाई: भारत के सबसे महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में से एक ढोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (SIR) की विकास यात्रा में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया, जब अधिराज ब्रोगहर डेवलपर LLP ने अपने प्रोजेक्ट ‘द क्राउन’ का भव्य भूमि पूजन समारोह रोजका रोड, ढोलेरा SIR स्थित परियोजना स्थल पर सफलतापूर्वक आयोजित […]

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प्रशांत मिश्रा: उद्योग नेतृत्व से शिव साधना की ओर — अनेक सफल उपक्रमों की प्रेरक यात्रा

नई दिल्ली, फरवरी 11: हर सफल उद्योगपति के पास उपलब्धियों की सूची होती है, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी पहचान केवल उनके व्यवसाय से नहीं, बल्कि उनके मूल्यों और सेवा भाव से बनती है। प्रशांत मिश्रा उन्हीं चुनिंदा नामों में शामिल हैं, जिन्होंने आध्यात्मिक चेतना और उद्यमिता को एक साथ जोड़कर सफलता की नई परिभाषा गढ़ी […]

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भूली-बिसरी विरासत में नई जान: हरि चंदना आईएएस की दृष्टि

हैदराबाद (तेलंगाना), फरवरी 09: हैदराबाद के ऐतिहासिक उस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर में स्थित अतीत की एक भूली हुई धरोहर — मह लका बाई बावड़ी — आज दशकों की उपेक्षा के बाद पुनर्जीवित होकर फिर से अपने वैभव में खड़ी है। कभी मलबे से भरी और समय की धूल में खोई यह 18वीं सदी की संरचना अब सावधानीपूर्वक संरक्षण और पारिस्थितिक पुनर्जीवन के माध्यम से एक जीवंत विरासत स्थल में बदल चुकी है। इस पुनरुत्थान के केंद्र में हैं हरि चंदना आईएएस, जिनकी प्रशासनिक सोच निरंतर स्थिरता, संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता को जोड़ती रही है। यह बावड़ी का पुनर्जीवन कोई एकल उपलब्धि नहीं, बल्कि तेलंगाना भर में विरासत संरक्षण की उस निरंतर परंपरा का हिस्सा है, जिसे उन्होंने नेतृत्व प्रदान किया है। इस नवजागरण के केंद्र में वही अधिकारी हैं, जिनकी प्रशासनिक यात्रा ने तेलंगाना में उपेक्षित स्थानों को जीवंत सार्वजनिक संपत्तियों में बदला है। शहर की विरासत: जीएचएमसी के वर्ष जिला प्रशासन में आने से पहले, हरि चंदना आईएएस ने ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) में ज़ोनल कमिश्नर के रूप में हैदराबाद के शहरी परिदृश्य को आकार दिया — जहाँ स्थिरता और विरासत संरक्षण दैनिक शासन के मूल तत्व बने। इस दौर की सबसे प्रतीकात्मक विरासत बहाली में से एक थी बांसिलालपेट बावड़ी — हैदराबाद के पुराने शहर में स्थित 17वीं सदी की बावड़ी, जो दशकों तक कचरे और उपेक्षा में दबी रही थी। इस बहाली ने एक कचरे से भरे गड्ढे को मनमोहक विरासत स्थल में बदल दिया — प्राचीन पत्थर की सीढ़ियाँ फिर खुलीं, पारंपरिक स्थापत्य बहाल हुआ और बावड़ी को सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सार्वजनिक जीवन में लौटाया गया। यह उस समय GHMC में आए व्यापक बदलाव को भी दर्शाता था: ऐतिहासिक सार्वजनिक स्थलों की पुनर्प्राप्ति पारंपरिक जल संरचनाओं का पुनर्जीवन शहरी विकास में स्थिरता का समावेश यही शहरी विरासत जागरण आगे चलकर नारायणपेट जिले में नेतृत्व किए गए व्यापक बावड़ी पुनर्जीवन आंदोलन की नींव बना। नारायणपेट में जिला-स्तरीय विरासत जागरण नारायणपेट की कलेक्टर बनने पर उनकी सोच का पूर्ण रूप सामने आया — एक ऐसा क्षेत्र जो ऐतिहासिक बावड़ियों से समृद्ध था, पर लंबे समय से उपेक्षित रहा। बाराम बावड़ी — जहाँ से पुनर्जीवन की शुरुआत हुई पहली बड़ी सफलताओं में से एक थी बाराम बावड़ी, जो सदियों पुरानी होते हुए भी कचरे और उपेक्षा में दबी हुई थी। उनके नेतृत्व में: मलबा हटाया गया मूल पत्थर संरचना का संरक्षण किया गया सामुदायिक स्वामित्व को पुनर्स्थापित किया गया परिणाम असाधारण रहे — त्योहार लौटे, परिवार जुटने लगे और बावड़ी ने फिर से जल स्रोत और सामाजिक केंद्र की अपनी भूमिका हासिल की। यह केवल बहाली नहीं थी। यह सार्वजनिक जीवन में पुनर्जन्म था। प्राचीन बावड़ियों के भूले हुए नेटवर्क की पुनः खोज बाराम बावड़ी के पुनर्जीवन ने एक व्यापक पहल को जन्म दिया। हरि चंदना ने नारायणपेट जिले में दर्जनों प्राचीन बावड़ियों के दस्तावेज़ीकरण और चरणबद्ध पुनर्स्थापन की शुरुआत की — जिनमें से कई पीढ़ियों से ओझल थीं। ये केवल सौंदर्यात्मक सफाई अभियान नहीं थे। इनका फोकस था: पारंपरिक संरक्षण तकनीकें भूजल पुनर्भरण सामुदायिक संरक्षकता दीर्घकालिक स्थिरता धीरे-धीरे, पूरा जिला अपनी भूली हुई जल विरासत से फिर जुड़ गया — वे संरचनाएँ, जो सदियों पहले सूखे से लड़ने के लिए बनाई गई थीं, आज जलवायु लचीलापन बढ़ाने में सहायक बन रही हैं। वैश्विक विरासत मूल्यों के अनुरूप स्थानीय नेतृत्व बावड़ियों का महत्व यूनेस्को द्वारा वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है, जो पारंपरिक जल प्रणालियों को जलवायु-अनुकूल इंजीनियरिंग और सांस्कृतिक वास्तुकला की उत्कृष्ट कृतियाँ मानता है। भारत में यूनेस्को-सम्मानित स्थलों से यह स्पष्ट होता है कि बावड़ियाँ थीं: पर्यावरणीय अवसंरचना […]