नई दिल्ली, फरवरी 07: मदारी पासी आज भी अवध के लोकगीतों और कथाओं में जीवित हैं, लेकिन मुख्यधारा इतिहास में उन्हें कम ही स्थान मिला क्योंकि राष्ट्रवादी इतिहास संभ्रांतवादी नेताओं पर केंद्रित रहा। आंदोलन ने किसान अधिकारों की बहस को मजबूत किया, जो स्वतंत्र भारत में भूमि सुधारों में योगदान दिया। हालांकि, इसका हिंसक स्वरूप […]

